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अंटार्कटिका में रहने से दिमाग पर पड़ता है ऐसा असर, जान कर रह जाएंगे हैरान

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क्या आपके दिमाग में कभी बर्फ से ढंके अंटार्कटिका में रहने का ख्याल कुलबुलाता है? अगर हां, तो जान लीजिए कि अंटार्कटिका में रहने से आपका दिमाग सिकुड़ भी सकता है. एक नई स्टडी के मुताबिक, अंटार्कटिका में 14 महीने तक रहने से ध्रुवीय खोजकर्ताओं का एक दल जब वापस लौटा तो उनका दिमाग सिकुड़ा हुआ पाया गया. इस दल में अंतरिक्ष यात्री भी शामिल थे.

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दल में शामिल आठ वैज्ञानिक और एक रसोइया अटलांटिक महासागर के दक्षिण में बर्फीले महाद्वीप के तट के करीब स्तिथ एक रिसर्च स्टेशन पर रुके थे. यहां एक खाली स्थल को देखने में इतना समय बिताने और उन्हीं लोगों के साथ एक छोटे से घर में एक साल से ज्यादा समय तक रहने के बाद उनके दिमाग पर भारी असर पड़ा.

एमआरआई से हुआ खुलासा:

यात्रा पर जाने से पहले और बाद में उनके दिमाग का एमआरआई किया गया. इस स्कैन में दिमाग के उन हिस्सों के बारे में खुलासा किया जो सीखने, भावुकता और याददाश्त के लिए जिम्मेदार होते हैं. स्कैन में ये सभी हिस्से सिकुड़े पाए गए. यह अध्ययन न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.

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अध्ययन में पाया गया कि अंतरिक्ष में जाने पर अंतरिक्ष यात्रियों के मस्तिष्क में कई परिवर्तन होते हैं. उनकी मानसिक क्षमता में कमी आ जाती है. यह शोध जर्मनी और पेंसिल्वेनिया की यूनिवर्सिटी में हुआ.

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(एजेंसी-भाषा)



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