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किसान और जासूसी के मुद्दे पर राष्ट्रपति से मिलने पहुंचे सिर्फ 4 दल, TMC, DMK, कांग्रेस ने किया किनारा

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नई दिल्ली. किसानों और जासूसी के मसले पर संसद में विपक्ष भले ही सरकार से एकजुट होकर चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन विपक्षी की पार्टियां हर जगह एकजुट नहीं दिखाई दे रही. अकाली दल, बीएसपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस और एनसीपी का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिला लेकिन विपक्ष की बड़ी पार्टियों के सांसद नदारद दिखे. गौर करनेवाली बात है कि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने व्यक्तिगत तौर पर कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके नेताओ से संपर्क किया लेकिन कोई भी इन पार्टियों से वहां नहीं पहुंचा.

विपक्ष की महत्वपूर्ण पार्टियों के सांसदों के गैरमौजूदगी के न्यूज़ 18 इंडिया के सवाल पर हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि ‘यह दुख की बात है. हम चाहे छोटी पार्टियां हैं लेकिन हम देश के कोने कोने का प्रतिनिधित्व करते हैं. दुख की बात है मैंने खुद से कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी से संपर्क साधा टीएमसी और डीएमके से संपर्क साधा कि हम लोग एक साथ मुद्दे उठाएं हमने राष्ट्रपति से समय लिया है एक साथ जाए, लेकिन कोई पार्टियां नहीं आई.’

ज्ञापन में बड़ी विपक्षी पार्टियों के हस्ताक्षर नहीं!
गौर करने वाली बात है कि राष्ट्रपति को अकाली दल के नेतृत्व में गए प्रतिनिधि मंडल के ज्ञापन पर कई छोटी पार्टियों के सांसदों के हस्ताक्षर हैं लेकिन बड़ी विपक्षी पार्टियों के सांसदों की तरफ से हस्ताक्षर नहीं किया गया है. अकाली दल के अलावा एनसीपी, बीएसपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, सीपीआई, राष्ट्रीय लोक दल के हस्ताक्षर हैं लेकिन कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके के किसी भी सांसद का हस्ताक्षर ज्ञापन पर नहीं है.

किसानों और जासूसी मसले पर राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग!
अकाली दल के नेतृव में विपक्ष के दलों ने किसानो और जासूसी के मसले पर संसद में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की है औए किसानों के मसले पर संयुक्त सेलेक्ट कमेटी बनाने की मांग की है. प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि दो हफ्ते से सारा विपक्ष किसानों और जासूसी के मसले पर विपक्ष मांग कर रहा है लेकिन सरकार चर्चा नहीं करवा रही.

हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि राष्ट्रपति से हमने कहा है कि संसद के अंदर किसानों की आवाज दबाई जा रही है और संसद के बाहर भी दबाई जा रही है. हमने राष्ट्रपति से मांग की है कि राष्ट्रपति हस्तक्षेप करें और संसद में चर्चा हो. सरकार पर दबाव दिया जाय.

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