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कोविड-19 महामारी के कारण आर्थिक हालात सुधरने में अभी लगेगा लंबा समय

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रिजर्व बैंक के गवर्नर ने गुरुवार को मौद्रिक नीति की घोषणा की

नई दिल्ली:

समग्र घरेलू उत्‍पाद या GDP की रफ़्तार इस साल के पहले हिस्से मेँ संकुचन (contraction) मेँ रहने की आशंका है. मौद्रिक नीति कमेटी में भारतीय इकोनॉमी की विस्तार से समीक्षा के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI Governor) शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने यह बात कही. वित्‍तीय वर्ष 2020-21 में जीडीपी की विकास दर भी नेगेटिव रहने का अनुमान है. “आरबीआई गवर्नर ने आगाह किया कि देश मेँ बढ़ते कोरोना के मामलों का असर अर्थव्यवस्था में सुधारों की रफ़्तार पर भी पड़ रहा है. कोविड-19 महामारी की वजह से हालत सुधरने मेँ अभी लंबा वक्त लग सकता है. 

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रिजर्व बैंक गवर्नर ने बताया कि कमजोर पड़ती अर्थव्‍यवस्‍था को पटरी पर लाने के लिए रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट मेँ बदलाव नही किया जा रहा है.बाजार में नकदी बढ़ाने के लिए नाबार्ड और नेशनल हाउसिंग बैंक को 10,000 करोड़ दिए जाएंगे. इस बीच बैंकर केवी कामथ की अगआई में एक हाई लेवल कमेटी बनाई गई है जो कॉर्पोरेट्स के लोन से जुड़े प्लान तैयार करेगी.आरबीआई ने संकट झेल रहे छोटी-लघु इकाइयों को 31 मार्च 2021 तक अपने क़र्ज़ की रिस्ट्रक्चरिंग करने की सुविधा दी है. हालांकि लोन पर मोरेटोरियम की अवधि और आगे नहीं बढ़ने से वित्तीय संकट में फंसी MSME इकाइयों का संकट बढ़ेगा।  

  

छोटे-लघु उद्योग संघ के महासचिव अनिल भारद्धाज ने एनडीटीवी से कहा, “3 अगस्त तक जो मोरेटोरियम पीरियड था उसे आरबीआई ने आगे बढ़ाने से इंकार कर दिया है. जिस वजह से जो MSME लोन चुकाने की स्थिति में नहीं हैं उन्हें रिस्ट्रक्चरिंग मेँ जाना होगा. रिस्ट्रक्चरिंग का कोई क्रेडिबल मैकेनिज्म अभी नहीं है. कुछ MSME को इसकी वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है”. साफ़ है, अर्थव्यवस्था का संकट बड़ा है और कोविड-19 महामारी की वजह से हालत सुधरने मेँ अभी काफी लम्बा वक्त लगेगा.

रेपो रेट और अन्य अहम दरों में नहीं हुआ बदलाव



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