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खौलते तेल में हाथ डाल कर निकाल लेते हैं ‘पकौड़े’, सालों से जारी है स्वाद का सफर– News18 Hindi

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अगर आप मछली खाने के शौकीन हैं और करोल बाग के आसपास से गुजरे हैं, तो गणेश रेस्टोरेंट (Ganesh Restaurant) का नाम भी जरूर सुना होगा. गए भी होंगे और स्वाद भी चखा होगा. पिछले करीब 60 सालों से यह स्टॉल (जो अब दुकान बन चुकी है) फ्राईड फिश (Fried Fish) का स्वाद बांट रहा है. इनकी एक और बड़ी खासियत है, जिसे देखने भर के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं.

कमाल करते हैं ‘गणेश’ वाले

जैसे ही आप इस मशहूर दुकान के पास पहुंचते हैं आपको इसकी विश्वसनीयता जांचने के लिए कुछ नहीं करना. आपको यहां स्टॉल पर सबसे आगे दुकान के मालिक हाथ से ही पकौड़े तलते नजर आ जाएंगे. जी हां, खौलते तेल में नंगे हाथों से पकौड़े निकालने को देखने के लिए भी यहां बहुत से लोग आते हैं.

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यह है हाथ से पकौड़े निकालने की कला की कहानी
तीसरी जेनरेशन के दुकान मालिक का कहना है कि यह कला उनके दादा जी से पिता जी और अब उनमें है. पहले ज्यादा भीड़ हो जाने पर लोग जल्दी मचाते थे. तभी दादा जी ने हाथ डाल कर पकौड़े दिखाना शुरू किया कि तेल तो अभी ठंडा है, जबकि असल में तेल गरम होता था. तभी से यह परंपरा शुरू हो गई है.

मछली के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग

वैसे तो समय के साथ इनके पास अब थोड़ी बड़ी दुकान और कई सारे आइटम मेन्यू में हो गए हैं, लेकिन मछली फ्राई इनकी सबसे मशहूर डिश है. सुरमई मछली की बोनलेस और विथ बोन दोनों प्रकार को विशेष मसाले में फ्राई कर के निकालते हैं. दूर-दूर से लोग कई सालों से यहां फिश फ्राई खाने आते हैं.

कोई 40 साल से तो कोई 50 साल से आता है

जब भी आप यहां पहुंचेंगे आपको स्टॉल को घेरे हुए लोग मिलेंगे. इनमें से लगभग सभी रेग्युलर ग्राहक होंगे. साथ ही कोई 40 तो कोई 50 सालों से लगातार यहां आ रहा है. हमें एक व्यक्ति तो वो भी मिलें जो नॉनवेज तो छोड़ चुके हैं, लेकिन अपने नाती-पोतों के साथ यहां स्वाद लेने आए थे.

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40 सालों से यहां आ रहे जसविंदर जी ने कहा कि वे यहां आते हैं और सीधे सुरमयी मछली का आर्डर देते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि अपने सारे मित्रों को यहां ला चुके हैं. रेस्टोरेंट शाम 4 बजे से रात्रि 11 बजे तक आपको खुला मिल जाएगा. मछली के पकौड़े आपको वजन के अनुसार मिलते हैं.

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