अटल बिहारी वाजपेई अब हमारे बीच नहीं रहे लंबे समय से बीमार चल रहे वाजपेई जी को 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था

भारत की पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का निधन गुरुवार शाम 5:00 बज के 5 मिनट पर हो गया वह 93 साल के थे लंबे समय से बीमार चल रहे थे वाजपेई जी को सांस लेने में परेशानी यूरिन व किडनी में संक्रमण होने के कारण 11 जून को एम्स में भर्ती किया गया था 15 अगस्त को उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी जिसके बाद उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया AIIMS से उनका पार्थिव शरीर उनके निवास कृष्ण मेन मार्ग पर लाया लाया गया शुक्रवार को सुबह 9:00 बजे अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को भाजपा मुख्यालय पर लाया जाएगा और 1:00 बजे अंतिम यात्रा प्रारंभ की जाएगी शाम 4:00 बजे स्मृति स्थल पर उनकी अंतिम संस्कार किया जाएगा |

 

भारत सरकार ने 7 दिन का राजकीय शोक घोषणा किया है इस दौरान भारत का आधार झंडा झुका रहेगा |

उत्तर प्रदेश ,उत्तराखंड ,झारखंड और बिहार ने 7 दिन का राजकीय शोक घोषणा किया पंजाब में 3 दिन का राजकीय शोक घोषित किया है|

उत्तर प्रदेश, दिल्ली, झारखंड ,बिहार, उत्तराखंड और पंजाब में कल स्कूल कॉलेज और सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे

भोजपुरी का अंतिम स्मृति स्थल पर किया जाएगा केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने इसके लिए डेढ़ एकड़ जमीन मुहैया कराई है

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने कल दिल्ली के बाजार बंद करने का निर्णय लिया है |

 

एम्स के मुताबिक माने तो बुधवार सुबह वाजपेई को सांस लेने में तकलीफ हुई थी इसके बाद उन्हें जरूरी दवाइयां दी गई थी लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया भाजपा सरकार के संस्थापकों में शामिल वाजपेई तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे वह पहले ऐसे गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया उन्होंने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया

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बताया जा रहा है वाजपेई काफी दिनों से बीमार थे और वह करीब 15 साल पहले राजनीति से संन्यास ले चुके थे अटल बिहारी वाजपेई ने लालकृष्ण आडवाणी के साथ मिलकर भाजपा की स्थापना की थी और उसे सत्ता के शिखर पहुंचाया भारतीय राजनीति के अटल-आडवाणी की जोड़ी सुपरहिट साबित हुई अटल बिहारी देश के उन चुनिंदा राजनेताओं में से एक थे जिन्हें दूरदर्शी माना जाता था और उन्हें अपने राजनीतिक कैरियर में एक ऐसे फैसले के लिए जिसे देश और उनके खुद के राजनीतिक छवि को काफी मजबूती दी|

उनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को महा मुहूर्त में शिंदे की छावनी वाले घर में हुआ था वैसे उनके स्कूल के सर्टिफिकेट में जन्म तिथि 25 दिसंबर 1926 लिखी है वह 2 वर्ष का अंतर उनके पिता ने इसलिए कराया था कि कम आयु लिखी जाएगी तो लड़का ज्यादा दिनों तक नौकरी कर सकेगा|

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इस संदर्भ का जिक्र स्वयं  अटल बिहारी वाजपेई ने ग्वालियर के श्री नारायण  30 को 7 जनवरी 1986 को लिखे पत्र में किया था मैंने लिखा था नहीं लिखा था आपका पत्र मिला बड़ी प्रसंता हुई इतने सब्जी साथियों में यह भी किसी निकेश नसीराबाद की अभिलाषा रहती है तो वह आप ही हैं मेरा जन्म 1924 हुआ था पिताजी ने स्कूल में नाम लिखते समय 1926 दिखा दिया उम्र का मोगी तो नौकरी ज्यादा का सकेगा देर में रिटायरमेंट होगा उन्हें क्या पता था कि मेरी वर्षगांठ मनेगी और मनाने वाले मुझे छोटा बना कर पेश करेंगे|


By:-  Abhishek Bajpai

 

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