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महिला कैप्टन के यौन उत्पीड़न पर हवलदार का कोर्ट मार्शल: सेना ने बर्खास्त करने की सिफारिश की, एक साल के लिए जेल भेजा

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गंगटोकएक मिनट पहले

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इंडियन आर्मी के एक नॉन कमीशंड ऑफिसर (NCO) का महिला कैप्टन से यौन उत्पीड़न के केस में कोर्ट मार्शल किया गया है। सिक्किम में तैनात इस हवलदार रैंक के अफसर को बर्खास्त करने की सिफारिश की है। उसे इस मामले में एक साल के लिए जेल की सजा देने को भी कहा गया है।

रिवर राफ्टिंग कोर्स के लिए सिक्किम गई थी कैप्टन
जानकारी के अनुसार, महिला कैप्टन के साथ यह घटना पिछले साल उस समय हुई थी, जब वह 17 माउंटेन डिवीजन एरिया में रिवर राफ्टिंग कोर्स के लिए सिक्किम गई थी। महिला अफसर को वहां आधिकारिक आवास अलॉट किया गया था। दोषी हवलदार ने उसी समय यह अपराध किया।

आरोपी ने कमरे में घुसकर अश्लील कमेंट किए
आरोपी ने महिला के स्टे के दौरान उसके कमरे में जबरन घुसकर अश्लील कमेंट किए। हालांकि महिला अधिकारी भागने में कामयाब रही और अधिकारियों से घटना की शिकायत की। आरोपी पर शील भंग करने की कोशिश और क्रिमिनल फोर्स का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया। शिकायत पर सेना ने तत्काल मामले की जांच शुरू की। जांच में NCO को दोषी पाया गया।

कोर्ट मार्शल क्या है, इसमें कैसे सजा होती है?
सेना में नियम तोड़ने या अनुशासन भंग करने के लिए कोर्ट मार्शल करने का नियम है। सशस्त्र सेनाओं में यह एक तरह की इंटरनल ज्यूडिशियल प्रोसेस है। इसमें गलती करने पर सजा दी जाती है। आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में कोर्ट मार्शल के जरिए जवान या अफसर के अपराध का फैसला करने के लिए अलग-अलग नियम हैं। यह ट्रायल मिलिट्री कानून के तहत होता है। इसमें 70 तरह के अपराधों के लिए सजा का प्रावधान है।

सिक्किम की 617 बटालियन में हुआ कोर्ट मार्शल
आरोपी का कोर्ट मार्शल सिक्किम में 617 EME बटालियन में हुआ। इसी में अफसर को पिछले हफ्ते सेवा से बर्खास्त करने के साथ एक साल की जेल की सजा देने की सिफारिश की गई। इस मामले में कोर्ट के चेयरपर्सन लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक शाही थे, जबकि अभियोजन पक्ष के वकील अक्षित आनंद थे। भारतीय सेना इन मामलों को लेकर बहुत सख्त रही है। पिछले कुछ साल में ऐसे मामलों में कई अधिकारियों और पुरुषों को सस्पेंड किया जा चुका है।

सेना में अनुशासन और रैंक की बहुत अहमियत है, नीचे दिए ग्राफिक में आप सेना की रैंक्स के बारे में जान सकते हैं…

इंडियन आर्मी में महिलाओं की भर्ती 1888 में शुरू हुई थी
भारत में ब्रिटिश राज के दौरान 1888 में इंडियन मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (IMNS) में महिलाओं की भर्ती हुई थी। यह पहला मौका था जब महिलाओं को इंडियन आर्मी में शामिल किया गया था। इंडियन गवर्नमेंट्स आर्मी रिक्रूटमेंट सर्विस के अनुसार 1992 में पहली बार महिलाओं को नॉन-मेडिकल रोल में शामिल किया गया था। वहीं संयुक्त राष्ट्र के लिए पहली ऑल-फीमेल पीस कीपिंग फोर्स 105 भारतीय महिलाओं से बनी थी, जो 2007 में लाइबेरिया में तैनात की गई थी। यह भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में अपनी तरह की पहली फोर्स थी।

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