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मेंटल ग्रोथ के लिए पढ़िए ये 8 किताबें: फणीश्वर नाथ रेणु से चार्ल्स डार्विन तक देंगे एक नई सोच की ताकत

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एक घंटा पहले

‘यदि आप केवल वही किताबें पढ़ते हैं जो बाकी सभी पढ़ रहे हैं, तो आप केवल वही सोच सकते हैं जो बाकी सभी सोच रहे हैं।’

– जापानी लेखक हारुकी मुराकामी अपनी किताब ‘नॉर्वेईयन वुड’ में

करिअर फंडा में स्वागत!

आज हम आपको 8 ऐसी एडवांस लेवल बुक्स के बारे में बताएंगे, जिन्हें पढ़ कर आप अपना सोचने की ताकत बढ़ा सकते हैं। इन्हें आप, समय के साथ, अपनी लाइब्रेरी में जरूर जोड़ें।

किताबें बहुत सी पढ़ी होंगी तुमने!

किताबें कई तरह की होती हैं, और अलग-अलग तरह से हमें इम्पैक्ट करती हैं। लेकिन आज की बुक्स एडवांस लेवल की वो रोचक गाथाएं हैं जिन्हें पढ़कर हर स्टूडेंट, प्रोफेशनल और होममेकर एनरिच हो सकता है। आपकी सोचने की क्वालिटी, विचारों को आकार देने की स्किल और कॉन्फिडेंस सब बढ़ेगा। पक्का! मैंने जब ये पढ़ीं थीं, और अपनी लाइब्रेरी में जोड़ी थीं, मुझे आनंद ही आनंद मिला। क्या आप तैयार है ‘प्योर जॉय’ के लिए?

8 एडवांस लेवल बुक्स जो आपको तुरंत फायदा देंगी

1) मैला आंचल

फणीश्वरनाथ रेणु को उनकी खास लेखन शैली के लिए जाना जाता था जिसमें आंचलिक मुहावरों और भाषा का इस्तेमाल ज्यादा था। उन्हें जनक्रांतिकारी लेखकों में गिना जाता है।

शुरुआत हिंदी किताब से करते हैं। फणीश्वरनाथ रेणु की लिखी, ‘मैला आंचल’ 1954 में प्रकाशित हुई थी और इसकी कहानी 1942 से शुरू होकर आजादी के बाद तक जाती है। इसे हिंदी साहित्य का पहला और सर्वश्रेष्ठ रीजनल नॉवेल माना जाता है। कहानी नेपाल की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी बिहार के एक पिछड़े ग्रामीण अंचल की हैं जहां डॉक्टर प्रशांत पहुंचते हैं। मलेरिया और कालाजार पर शोध करते हैं, लेकिन वहां उनका सामना होता है, गांव में फैले अंधविश्वास, कुरीतियों, सामाजिक शोषण और किसानों की दुर्दशा से। मैला आंचल, हिंदुस्तान के गांव के जनजीवन, वहां की बोली, भाषा, लोक संस्कृति, मान्यताएं, विश्वास, रीति-रिवाज और उनके सुख-दुख को बेहद विश्वसनीय ढंग से प्रस्तुत करता है। मुझे सबसे ज्यादा इसकी आंचलिकता पसंद आती है।

2) प्राइड एंड प्रिजुडिस (Pride and Prejudice)

यह नॉवेल जेन ऑस्टिन ने 1797 में लिखा था। यह 1813 में पब्लिश हो पाया था। उस दौर में महिलाओं के स्वतंत्र विचारों की पैरवी करना अपने आप में एक क्रांति थी।

यह नॉवेल जेन ऑस्टिन ने 1797 में लिखा था। यह 1813 में पब्लिश हो पाया था। उस दौर में महिलाओं के स्वतंत्र विचारों की पैरवी करना अपने आप में एक क्रांति थी।

जेन ऑस्टेन की इस किताब को अब तक के सबसे प्रसिद्ध और सबसे दिलचस्प उपन्यासों में गिना जाता है। प्राइड एंड प्रिजुडिस दो बिल्कुल विपरीत किरदारों के बीच प्रेम की कहानी है जो ऐसे विक्टोरियन दौर में रह रहे हैं जहां सामाजिक ढांचे और शिष्टाचार की बेड़ियां अटूट हैं। उपन्यास सामाजिक अपेक्षाओं के मोड़ और बाधाओं को नेविगेट करने की कोशिश कर रही एक युवा महिला की आत्मनिरीक्षण यात्रा साबित होती है। मुझे इसमें प्रेम की ताकत की बात बहुत पसंद आई।

3) छावा

छावा उपन्यास को मराठों और मुगलों के ऐतिहासिक संबंधों के साथ ही छत्रपति शिवाजी के परिवारिक संबंधों का लेखा-जोखा माना जाता है।

छावा उपन्यास को मराठों और मुगलों के ऐतिहासिक संबंधों के साथ ही छत्रपति शिवाजी के परिवारिक संबंधों का लेखा-जोखा माना जाता है।

लेखक शिवाजी सामंत द्वारा लिखा गया, ‘छावा’ एक बड़ा और ऐतिहासिक उपन्यास है, जो छत्रपति शिवाजी के बेटे संभाजी को केंद्र में रखता है। यह आपको विभिन्न रिश्तों जैसे पिता-पुत्र, पति-पत्नी, मां-पुत्र के बीच होने वाले इमोशंस की बारीकियों को बताने के साथ-साथ मराठा और मुगल इतिहास, उनके राजकरण, संस्कृति, युद्ध-जीवन आदि के बारे में भी बताता हैं। मेरा यह मानना है कि एक बार शुरू करने के बाद इस किताब को खत्म किए बिना रखना मुश्किल होता है। मुझे इसमें इमोशंस और जोश बढ़िया लगा।

4) मैकडॉनल्ड्स: बिहाइंड द आर्चेस

यह नॉवेल एक छोटे से रेस्टोरेंट में बड़े आइडिया के पनपने की कहानी है।

यह नॉवेल एक छोटे से रेस्टोरेंट में बड़े आइडिया के पनपने की कहानी है।

ये कहानी सिर्फ एक छोटे से रेस्टोरेंट से शुरू होकर एक मल्टीनेशनल तक के मैकडॉनल्ड्स के सफर की अविश्वसनीय दास्तान है। रेमंड क्रॉक का विजन अतुलनीय दिखता है, और बर्गर बनाने जैसे धंधे में विज्ञान का प्रयोग, अकल्पनीय। हर आंत्रप्रेन्योर जरूर पढ़े। मुझे इसका आसान फ्लो मजेदार लगा।

5) ययाति

मूलत: मराठी में लिखा गया नॉवेल अब तक कई भाषाओं में ट्रांसलेट हो चुका है।

मूलत: मराठी में लिखा गया नॉवेल अब तक कई भाषाओं में ट्रांसलेट हो चुका है।

विष्णु खांडेकर की लिखी यह किताब मुझे किसी सम्राट के जीवन का सबसे जीवंत चित्रण लगती है। यह मेरा फेवरेट पौराणिक उपन्यास है। एक राजकुमार जिसे अपने पूर्वजों के कृत्यों से बराबरी करनी है परंतु जिसे श्राप का भय भी है। जिसे महलों की सुख सुविधाओं की चाह नहीं हैं परंतु दूसरा मार्ग भी नहीं होने से मजबूर है। जो कामातुर है और अपनी पत्नी का अंकुश भी नहीं सह सकता। एक ऐसे मनुष्य की भावनाओं का श्रेष्ठ चित्रण लेखक ने किया है। ऐतिहासिक विश्लेषण अच्छा लगा।

6) द फाउंटेनहेड (The Fountainhead)

एन रैंड ने एक नई दार्शनिक विचारधारा ‘ऑब्जेक्टिविज्म’ को जन्म दिया था और यह किताब उसका मूल ग्रंथ मानी जाती है।

एन रैंड ने एक नई दार्शनिक विचारधारा ‘ऑब्जेक्टिविज्म’ को जन्म दिया था और यह किताब उसका मूल ग्रंथ मानी जाती है।

एन रैंड का उपन्यास ‘द फाउंटेनहेड’ हमें अपनी इंडिविजुअल स्ट्रेंथ को बढ़ाने, और समाज के दबाव में खुद को न कुचलने का सन्देश देती है। हावर्ड रोर्क एक ऐसे शहर में एक दूरदर्शी आर्किटेक्ट है जहां व्यक्तित्व की सराहना नहीं की जाती है। वह अपने समय से आगे है और दुनिया उसके लिए तैयार नहीं है। रोर्क समझौता करने से इंकार कर देता है और समाज के पास उसे नष्ट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि वह बहुत अलग है। यह पीटर कीटिंग की भी कहानी है, जो रोर्क को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता हैं। मुझे इसमें किरदारों का संघर्ष और विजय का चित्रण अद्भुत लगा।

7) राग-दरबारी

राग दरबारी लगभग हर भारतीय भाषा में ट्रांसलेट हो चुका है।

राग दरबारी लगभग हर भारतीय भाषा में ट्रांसलेट हो चुका है।

अगली किताब, 1968 में प्रकाशित राग दरबारी, हिंदी साहित्य की सर्वश्रेष्ठ व्यंग्य कृति मानी जाती हैं। इसके लेखक हैं श्रीलाल शुक्ल। यह मेरी फेवरेट व्यंग्यात्मक पुस्तक है। इसमें शिवपालगंज नामक एक गांव की बात है, जहां सरकारी तंत्र बिल्कुल भ्रष्ट हो चुका है और स्थिति दिन पर दिन बदतर होती जा रही है। लोग अपने स्वार्थों की सिद्धि में लगे हुए हैं तथा गांव का विकास रुका हुआ है। यह किताब आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक लगती हैं। व्यंग्यात्मक शैली में लिखी गई इस किताब को हिंदी साहित्य में क्लासिकल का दर्जा हासिल है। मुझे इसमें लेखक का हास्य-बोध बढ़िया लगा।

8) ओरिजिन ऑफ स्पीशीज (Origin of Species)

1859 में जब चार्ल्स डार्विन ने अपनी इस किताब में इवोल्यूशन की थ्योरी दी तो कोई इसे मानने को तैयार नहीं हुआ। बाद में यही किताब इवोल्यूशनरी साइंस की बाइबल मानी जाने लगी।

1859 में जब चार्ल्स डार्विन ने अपनी इस किताब में इवोल्यूशन की थ्योरी दी तो कोई इसे मानने को तैयार नहीं हुआ। बाद में यही किताब इवोल्यूशनरी साइंस की बाइबल मानी जाने लगी।

चार्ल्स डार्विन की लिखी यह किताब अपने (और किसी भी) समय की सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली पुस्तकों में से एक है। लेकिन यह पुस्तक आश्चर्यजनक रूप से, बहुत कम पढ़ी जाती है। इस पुस्तक ने दुनिया और मनुष्य की सोच को बहुत बदल दिया। यह अपने पहले प्रकाशन के एक सदी बाद भी शक्तिशाली और आकर्षक किताब है। दुनिया में मौजूद सभी प्रजातियों के ओरिजिन पर तकनीकी इनसाइट अपने आप में क्रांति थी, और है। मुझे इसका ठोस तकनीकी आधार, गहरे बौद्धिक तर्क और डार्विन का कॉन्फिडेंस बढ़िया लगा।

आज का करिअर फंडा है ‘पढ़ते रहिए बढ़ते रहिए’!

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