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‘मौत भी मैं शायराना चाहता हूं’, आज पेश है रोमांटिक शायरी

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मुहब्‍बत भरे दिलों की आवाज़…

उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में मुहब्‍बत (Love) की बात की गई है. इसमें इश्‍क़ से लबरेज़ जज्‍़बात (Emotion) को पूरी ख़ूबसूरती के साथ पेश किया गया है. आज मुहब्‍बत से महकते ऐसे ही कुछ अशआर…

  • News18Hindi
  • Last Updated:
    September 7, 2020, 2:45 PM IST

ग़ज़ल (Ghazal) यानी मुहब्‍बत के वे जज्‍़बात जो दिल से निकल कर दिल तक पहुंचते हैं. शेरो-सुख़न (Shayari) की दुनिया में यूं तो हर जज्‍़बात (Emotion) को बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है. मगर मुहब्‍बत (Love) भरे दिलों की आवाज़ को इसमें इतने दिलकश अंदाज़ में पिरोया गया है कि उसका असर होना लाजिमी है. आज हम शायरों (Shayar) के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए ‘रेख्‍़ता’ के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात ‘मुहब्‍बत’ की हो और रोमांटिक शायरी की, तो आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए…

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
बशीर बद्रदिल में किसी के राह किए जा रहा हूं मैं
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूं मैं

जिगर मुरादाबादी

वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा
परवीन शाकिर

दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तिरी याद थी अब याद आया
नासिर काज़मी

तुम मुझे छोड़ के जाओगे तो मर जाऊंगा
यूं करो जाने से पहले मुझे पागल कर दो
बशीर बद्र

हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएंगे
अभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ
क़तील शिफ़ाई

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मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा
सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए
कृष्ण बिहारी नूर

आते आते मेरा नाम सा रह गया
उस के होंटों पे कुछ कांपता रह गया
वसीम बरेलवी

शदीद प्यास थी फिर भी छुआ न पानी को
मैं देखता रहा दरिया तेरी रवानी को
शहरयार

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आख़री हिचकी तिरे ज़ानूं पे आए
मौत भी मैं शायराना चाहता हूं
क़तील शिफ़ाई

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