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वर्किंग कपल्‍स के लिए जॉइंट फैमिली है वरदान, होते हैं ये 4 फायदे

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Joint Family Importance And Advantages: भारत में संयुक्त परिवार की व्यवस्था पुराने समय से ही चली आ रही है. संयुक्‍त परिवार वह हैं जहां एक से अधिक पीढ़ी (Generation) के सदस्य एक छत के नीचे रहते हैं. इनमें दादा-दादी (Grand Parents), माता-पिता, चाचा-चाची और उनके बच्चे शामिल हैं. भारत में अभी भी संयुक्त परिवार का चलन है, लेकिन कई ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से अब जॉइंट फैमिली की संख्‍या कम होती जा रही है. हालांकि संयुक्त परिवार में रहने के कई फायदे भी हैं. ऐसे में आज भी संयुक्त परिवार के महत्व को नकारा नहीं जा सकता. यही वजह है कि एकल परिवार के इस युग में भी संयुक्त परिवार का चलन मौजूद है.

संयुक्‍त परिवार में रहने का एक फायदा यह भी होता है कि चचेरे भाई-बहन, चाचा-चाची और दादा-दादी के साथ बढ़ने से बच्चों को सभी से जुड़ने और करीबी बंधन में बंधे रहने का मौका मिलता है. बच्‍चे अपने से बड़ों का प्‍यार पाते हैं और उनका आदर करना सीखते हुए बड़े होते हैं. ऐसे में संयुक्त परिवार में रहने के कई फायदे होते हैं-

पारिवारिक मूल्यों को आत्मसात करना: कई ऐसी बातें जो पैरेंट्स अक्‍सर अपने बच्चों को सिखाना चाहते हैं, वे संयुक्त परिवार में इन्‍हें अच्छी तरह से सीखते हैं. एक साथ बढ़ते हुए बच्चे आपस में साझा करना, एक दूसरे की देखभाल करना और सभी का सम्मान करना सीखते हैं. इस तरह वे अपने आस-पास के लोगों के साथ हमदर्दी भरा रवैया रखना भी सीखते हैं.

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काम-काजी पैरेंट्स के लिए फायदेमंद: काम-काजी पैरेंट्स के लिए, जिन्हें अपने बच्चों के आस-पास रहने के लिए किसी भरोसेमंद व्यक्ति की जरूरत होती है, उनके लिए संयुक्‍त परिवार किसी वरदान से कम नहीं हैं. चाचा, चाची, या दादा-दादी के साथ जो बच्चों की देखभाल करते हैं. ऐसे में पैरेंट्स घर से बाहर निकल कर अपने घर और बच्‍चों के लिए चिंतित नहीं होते. ऐसे में पैरेंट्स को भी अपने लिए समय मिल जाता है.

किसी एक पर नहीं पड़ता भार: बड़ा परिवार एक बड़ी टीम के रूप में काम करता है. खासकर जब खाना पकाने या सफाई जैसे घर के काम करने की बात आती है, तो आपस में कामों का बंटवारा हो जाता है. ऐसे में किसी एक पर ही काम का भार नहीं पड़ता. नतीजतन, परिवार का कोई भी सदस्य कभी भी काम को लेकर तनाव महसूस नहीं करता.

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फाइनेंशियल सपोर्ट: क्‍योंकि संयुक्‍त परिवार के सभी कमाने वाले सदस्य घरेलू खर्चों के लिए एक ही जगह रुपये देकर योगदान करते हैं. इससे जहां खर्चों का बोझ कम होता है, वहीं जब किसी सदस्य को आर्थिक नुकसान या नौकरी छूट जाती है, तो परिवार के अन्य लोगों की ओर से उनकी दैनिक जरूरतों का ध्यान रखा जाता है.

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