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‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की आंतरिक रिपोर्टों के हवाले से खुलासा: इंस्टाग्राम लड़कियों में शर्मिंदगी और तनाव बढ़ने की वजह बन रहा है, फेसबुक को भी पता है पर इसकी अनदेखी कर रहा

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वॉशिंगटनएक घंटा पहले

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ऐसी ही एक आंतरिक रिपोर्ट में लिखा गया है, ‘हमने एक तिहाई लड़कियों के लिए बॉडी इमेज का मसला (अपने शरीर के बारे में सोच) हद दर्जे तक खराब बना दिया है।

फेसबुक ने मार्च-2020 में एक आंतरिक शोध किया था। इसमें चौंकाने वाले आंकड़े दर्ज थे। जैसे- 32 फीसदी लड़कियों ने माना था कि वीडियो-फोटो शेयरिंग प्लेटफार्म इंस्टाग्राम ने उनकी असुरक्षा की स्थिति को और अधिक खराब किया है। ऐसे ही, 13 प्रतिशत ब्रिटिश और छह फीसद अमेरिकी किशोरों ने माना था कि इंस्टाग्राम के उपयोग के कारण उनके मन में आत्महत्या के विचार आए हैं।

बताया जाता है कि इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग को यह शोध और इसके निष्कर्ष दिखाए गए थे। लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी संसद में अपनी पेशी के दौरान उन्होंने दावा किया था कि फेसबुक किशोरों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। वहीं, उनकी कंपनी ने उस शोध और उसके आधार पर तैयार की गई आंतरिक रिपोर्ट की अनदेखी की। उसे दबा दिया था।

फेसबुक की ऐसी ही आंतरिक रिपोर्टों के हवाले से अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने यह खुलासा किया है। इस खबर के मुताबिक ‘इंस्टाग्राम’ लड़कियों के लिए खास तौर पर शर्मिंदगी और तनाव बढ़ने की वजह बन रहा है। अखबार ने इस बाबत सिलसिलेवार खबरों में बताया है कि फेसबुक किस तरह अपने ही निर्धारित मापदंडों का उल्लंघन कर रहा है। इन रिपोर्टों में फेसबुक के पूर्व कर्मचारियों के बयान दर्ज हैं।

ये बताते हैं कि फेसबुक और उससे जुड़े अन्य प्लेटफाॅर्म न निष्पक्ष हैं और न साफ-सुथरे। ऐसी ही एक आंतरिक रिपोर्ट में लिखा गया है, ‘हमने एक तिहाई लड़कियों के लिए बॉडी इमेज का मसला (अपने शरीर के बारे में सोच) हद दर्जे तक खराब बना दिया है। लड़कियों में इसकी वजह से तनाव और अवसाद बढ़ रहा है। इसके लिए वे इंस्टाग्राम को दोषी ठहरा रही हैं क्योंकि वहां वे बॉडी शेमिंग (शरीर के बारे में छींटाकशी) की शिकार हो रही हैं।’

इन खुलासों पर फेसबुक की अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, इन खुलासों के बाद आलोचकों ने फेसबुक की तुलना तंबाकू और उससे जुड़े उत्पाद बनाने वाली कंपनियों से की है। उनके मुताबिक जिस तरह तंबाकू कंपनियां सिर्फ अपने मुनाफे के लिए तमाम वैज्ञानिक अध्ययनों को अनदेखा करती हैं। युवाओं के स्वास्थ्य और जीवन को खतरे में डालती हैं। वैसे ही फेसबुक भी अपने फायदे के लिए जानबूझकर आंतरिक शोध, रिपोर्टों आदि को नजरंदाज कर रही है।

डोनाल्ड ट्रम्प की मदद के लिए चलीं फर्जी खबरों की अनदेखी की थी

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने भी 2018 में बताया था कि फेसबुक सिक्योरिटी टीम को 2016 में डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थन में सोशल मीडिया के जरिए किए जा रहे रूस के दखल का पता चल चुका था। लेकिन कंपनी ने इस जानकारी को दबा दिया। इसी तरह ‘द वॉशिंगटन पाेस्ट’ ने बताया था कि फेसबुक ने 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद आंतरिक जांच कराई थी।

इसे ‘प्रोजेक्ट पी’ नाम दिया गया। इसमें ऐसे कई फर्जी अकाउंट का पता चला, जिनके जरिए ट्रम्प को जिताने के लिए प्रचार के दौरान फर्जी खबरें चलाई गई थीं। लेकिन इनमें से कुछ अकाउंट ही बंद किए गए।

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