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हरीश रावत के ट्वीट से बढ़ी कांग्रेस नेताओं की परेशानी, देर रात हुई घोषणा से मचा हड़कंप

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(स्वाति भान)

चंडीगढ़. कांग्रेस शासन वाले पंजाब में देर रात हुए तत्काल मीटिंग के ऐलान ने नया सियासी बखेड़ा खड़ा कर दिया है. दरअसल, कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत (Harish Rawat) ने शुक्रवार रात 11:52 पर ट्वीट के जरिए शनिवार को एक तत्काल सीएलपी बैठक (CLP Meeting) की जानकारी दी थी. इसके 10 मिनट बाद ही नए प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) ने ट्वीट कर सभी विधायकों को बैठक में मौजूद रहने के लिए कहा. बीती रात हुए ये फैसले देखने में अचानक लग सकते हैं, लेकिन इससे पहले पार्टी में हुई उठा-पटक संकेत दे रही है कि पार्टी हाई कमान पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder Singh) के विरोधी गुट का दबाव था.

ये काम दो दिन पहले शुरू हुए, जब करीब 40 विधायकों ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर सीएलपी की मांग की. साथ ही विधायकों ने गांधी से उन 18 एजेंडा की भी मौजूदा स्थिति देखने के लिए कहा, जो सीएम सिंह को चुनाव से पहले सौंपे गए थे. सूत्र बताते हैं कि इस पत्र ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को मुश्किल में डाल दिया था. इधर, रावत लगातार यह बात दोहरा रहे हैं कि सिंह को हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया था, लेकिन बड़ी संख्या में विधायकों के पत्र को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

पार्टी के भरोसेमंद सूत्रों ने जानकारी दी है कि मामले पर विचार करने के बाद आला कमान ने राज्य में विधायकों के मूड को भांपने के लिए दो ऑब्जर्वर्स क भेजा था. एक नेता ने बताया, ‘यह जानकारी जुटाई जानी थी कि क्या वाकई संख्या ज्यादा और कप्तान विरोधी विधायक उन्हें सीएम पद से हटाए जाने के लिए किस हद तक जा सकते थे.’ पार्टी ने हरीश चौधरी और अजय माकन को विधायकों से मुलाकात करने के लिए भेजने का फैसला किया था.

सूत्र बताते हैं कि बाद में इस योजना को भी रोक दिया गया. आशंका जताई जाने लगी थी इससे कैप्टन समर्थक और विरोधी गुट में नई खींचतान शुरू हो जाएगी. इसके बाद सीएलपी बुलाने का फैसला किया गया. सूत्र ने कहा, ‘ऑब्जर्वर्स के विधायकों से अलग-अलग मिलने ने फिर मीडिया में गलत संदेश दिया होगा.’ शुरुआत में यह तय किया गया था कि सीएलपी मीटिंग का ऐलान शुक्रवार को शाम 5 बजे के आसपास किया जाएगा, लेकिन एक बार प्लान में बदलाव किए गए और इसे कुछ घंटों के लिए रोक दिया.

एक नेता ने बताया, ‘रावत के मध्यरात्री चुनने की बात इस ओर इशारा करती है कि पार्टी आला कमान को डर है कि कैप्टन समर्थक विधायक अनिश्चितता तैयार करने के लिए कोई काम करेंगे.’ हालांकि, मध्यरात्री में हुए इस ऐलान से पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता भी परेशान हैं. एक नेता ने कहा, ‘यह ऐसा है, जैसे कोई सीक्रेट ऑपरेशन किया जा रहा है. अगर बैठक बुलानी ही थी, तो ऐसा करने का एक सही तरीका होता है. 11:42 पर ट्वीट करना बिल्कुल भी सही नहीं था, खासतौर से तब जब आप ऐसे किसी मुद्दे को संभाल रहे हों.’

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