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Opinion: पर्व त्योहारों पर लोगों के बीच जाकर आयोजन को यादगार बना देते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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5 अक्टूबर साल 2022 की विजयादशमी का दिन कुल्लू का दशहरा वहां की कई पीढ़ियों को याद रहेगा. याद रहे भी तो क्यों नहीं! आखिर आजाद भारत में पहली बार एक प्रधानमंत्री उनके बीच दशहरा मना रहा था. दूर हिमाचल की दुर्गम वादियों में. पीएम नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) कुल्लू के ढालपुर मैदान में पहुंचे तो श्रद्धालुओं और सैलानियों से भरा मैदान उनके स्वागत में करतल ध्वनि से गूंज उठा. और पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर कहा कि ये उनका सौभाग्य है कि उन्हें ऐतिहासिक कुल्लू दशहरे का हिस्सा बनने का अवसर मिला. खास बात ये कि वहाँ पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने फैसला लिया वो वहाँ के मुख्य भगवान रघुनाथजी के रथ तक जाएंगे और उनका आशीर्वाद लेंगे. रघुनाथजी की कुल्लू के इलाके में बड़ी मान्यता है. पीएम रथ पर पहुंचे तो वहाँ का माहौल देखते ही बनता था.

दरअसल कुल्लु का ये दशहरा उत्सव पूरी कुल्लू घाटी के 300 देवी देवताओं का एक जगह जमावड़े के कारण जाना जाता है. उत्सव के पहले दिन इन 300 भगवानों को सजा-संवार कर बाहर लाया जाता है और इन्हें मुख्य भगवान रघुनाथ जी के दर पर माथा टेक कर ढोलपुर के मैदान तक रथ यात्रा के तौर पर ले जाए जाते हैं. आज जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है तब पीएम मोदी ने एक परंपरा की शुरुआत कर दी है. पीएम ने विजयादशमी की शाम का समय कुल्लू के इस दशहरा उत्सव के लिए रखा ताकि देश दुनिया ये जान सके कि अपने पारंपरिक त्योहारों पर उन्हे कितना गर्व है और लोगों के बीच होना उन्हें खासा भाता है. कुल्लू का ये उत्सव अक्टूबर 11 तक मनाया जाएगा. अपने एक दिन के दौरे पर पीएम मोदी बिलासपुर में न सिर्फ एम्स का उद्घाटन करेगे बल्कि राष्ट्रीय राजमार्थ और दूसरी विकास परियोजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे. पीएम मदी ने विजयादशमी की शाम का समय कुल्लू के इस दशहरा उत्सव के लिए रखा है ताकि देश दुनिया ये जान सके कि अपने पारंपरिक त्योहारों पर उन्हे कितना गर्व है.

पीएम मोदी के कार्यकाल का 8 साल ऐसे उदाहरणों से पटा पड़ा है जब उन्होने भारतीय त्यौहारों हिस्सा लिया है. पिछले हफ्ते ही 29 सितंबर को पीएम मोदी अपने गुजरत दौरे पर अहमदाबाद के जीएमडीसी मैदान पर नवरात्र उत्सव में हिस्सा लेने पहुंच गए थे. 30 सितंबर की शाम उन्होंने अंबाजी के दर्शन किए थे. फिर गब्बर तीर्थ में पूजा भी की थी. प्राचीन कालीन ये मंदिर माता सती के एक ज्योतिर्लिंगों में से एक है. माना जाता है कि यह सरस्वती नदी के किनारे बसा था और यहीं माता सती का दिल गिरा था. 2017 के चुनावों में जब पीएम मोदी ने दिन भर के रोड शो और रैलियों के बाद देर शाम माता अंबाजी के दर्शन करने के बाद कहा था कि उनके लिए माता का आशीर्वाद और जनता के दर्शन ही असली ईश्वर दर्शन हैं. और यही ईश्वर दर्शन उन्हें भारत के कायाकल्प की ऊर्जा देता है.

इसी साल अगस्त में गणेश चतुर्थी के मौके पर पीएम मोदी देर रात केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल के घर जा पहुंचे थे. पीयूष गोयल के दिल्ली स्थित आवास पर भगवान गणेश की स्थापना हुई थी और पीएम गणेश चतुर्थी के मौके पर भगवान का आशीर्वाद लेने पहुंचे थे. भगवान का आशीर्वाद तो लिया ही लेकिन ये भी संदेश दे दिया कि अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के घर जाने में भी वो नहीं झिझकते. इसके ठीक विपरीत इस साल रक्षा बंधन के मौके पर, पीएम मोदी ने अपने आवास पर पीएमओ के सभी श्रेणी के कर्मचारियों की बेटियों से अपनी कलाई पर राखी बंधवायी थी. ये संदेश था कि मंत्री हो या संतरी या फिर कर्मचारी, पीएम मोदी की नजर में सब बराबर हैं.

बात आदिवासी त्यौहार बिहू की हो तो उस उत्सव को भी पीएम मोदी ने खूब तरजीह दी है. इस साल अप्रैल में केन्द्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल के घर बिहू फेस्टीवल में जा पहुंचे थे और वहां के कलाकारों के साथ खूब नगाड़े बजाए और पूरी मस्ती की. अप्रैल 2022 में ही पीएम मोदी ने प्रकाशोत्सव के मौके पर, लाल किले जाकर गुरु तेगबहादुर के 400वें प्रकाश पर्व में हिस्सा लिया था. इसके पहले दिसंबर 2021 में गुरु नानक देवजी के गुरुपर्व के मौके पर पीएम मोदी ने गुजरात के गुरुद्वारा लखपत साहब में पूरे सिख समुदाय को संबोधित भी किया था. अक्टूबर 2017 में गुरु गोविंद सिंह जी की 350 जयंती के मौके पर पटना में आयोजित एक भव्य समरोह में पीएम मोदी ने हिस्सा लिया था. सिख समुदाय को लेकर पीएम मोदी का विशेष लगाव पूरा देश और दुनिया के सामने आ जाता है जब दिल्ली में एक आम श्रद्धालु की तरह वो दिल्ली के गुरुद्वारों में माथा टेकने पहुंच जाते हैं.

फरवरी 2022 में संत रविदास जयंती में पीएम मोदी ने दिल्ली के करोल बाग इलाके में दलितों के आईकॉन माने जाने वाले गुरु रविदास के नाम समर्पित एक मंदिर राष्ट्र को समर्पित किया और साथ ही वहां बैठ कर शबद कीर्तन में भी हिस्सा लिया था. यही नहीं नवंबर 2020 में देव दीवाली के मौके पर पीएम मोदी ने वाराणसी में देव दीपावली महोत्सव में हिस्सा लिया था. इसी तर्ज पर अप्रैल 2018 की याद भी दिलाना चाहूंगा जब पीएम मोदी ने दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में बुद्ध जयंती समारोह में हिस्सा लिया था. फरवरी 2017 में महाशिवरात्रि के मौके पर पीएम मोदी कोयंबटूर जा पहुंचे थे और वहां आदियोगी भगवान शिव की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया था. ठीक उसी तरह अक्टूबर 2016 में पीएम ने अपना दशहरा लखनऊ में मनाया था. पीएम मोदी का अपनी प्राचीन परंपराओं और संस्कृति पर गर्व होना और आगे बढ़कर इन त्यौहारों में हिस्सा लेना एक बहुत बड़ा संदेश है दुनिया भर में रह रहे भारतीयों के लिए की अपनी सांस्कृतिक विरासत में इतना दम है कि देश विश्वगुरु बनने की राह पर चल पड़ा है.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

Tags: Prime Minister Narendra Modi



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